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Tuesday, April 24, 2012

बिखरे पन्ने


हर एक पन्ने पे शुरू एक नयी किताब है;
हर एक याद एक पुरा हुआ ख्वाब है.

बिखरे है पन्ने या सुलझे है कई सवाल;
हर पन्ने पे लिखा शायद कोई जवाब है

है पड़ी कितनी सारी बंद किताबे दुकान में;
बिखरे पन्ने याने जैसे खुली हुई किताब है

खुला हूँ ऐसे मै जैसे खुला असमान, वर्ना
लोगो के चहरोंपे जाने कितने नकाब है.

पन्ने होंगे बिखरे हुए हुजुर ये आपके लिए
मेरे लिए तो वो मेरी साँसे अजी जनाब है
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सारंग भणगे (२४ एप्रिल २०१२)

Sunday, February 19, 2012

पलक


तेरी पलक जो झुक गयी तो शाम हो गयी,
तेरी झलक जो दिख गयी तो भोर हो गयी.

तेरी हसीं हसी से मै हो गया दीवाना,
ऐसे छलक जो तू गयी तो दोपहर हुई.

तेरी जफ़ाओं के साए में जिंदगी,
मेरा फलक जो वो हुई तो रात हो गयी.

तनहाइयों में तो मेरे कुर्बत जो हो तेरी,
सासों तलक जो तू चली तो रूह धुल गयी.
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सारंग भणगे. (१७ फेब्रुवारी २०१२)

Thursday, January 19, 2012

नगमा

तेरी आँखोंसे चुराके नमी
लिख दी है मैंने ऐसी कविता,
पढ़के न बह जाए कही
तेरे नैनो से सावन की सरिता.

चुराके लबो से लाली ए कातिल
अल्फाज लिखे है ऐसे क्या कहू,
तुझे लगे माथे का सिंदूर
है मैंने बहाया रगों से लहू.

लेके तेरे गोरे रंग की स्याही
कुछ नगमा मैंने ऐसा लिख डाला,
सूरज डूबा जब पर्बत के पीछे
फैला है फिर भी चाहू ओर उजाला.

खुशबू चुराके सासों से तेरी
लिखी जो नज्मे हवाओ के ऊपर,
पढ़ने उसे हवाओ में उड़ते
धरती पे आये अम्बर से इश्वर.
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सारंग भणगे. (१९ जानेवारी २०१२)

Sunday, December 4, 2011

मोती


तुमने बारिश जो छुली होती; बूंद बूंद फिर बन जाते मोती,
होठो से तू लब्ज जो कहती; वो भी तो फिर बन जाते मोती.

जिनकी नमी ने पलकें तेरी छुली वो है आंसू मोती,
जो तू उनको छू पाती तो; चाँद सितारे बन जाते मोती.

तू जो कागजपर लिख देती; अक्षर भी फिर बन जाते मोती,
सुंदर तेरे रूप को पाकर; जीवन ही फिर बन जाये मोती.
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सारंग भणगे (१ दिसम्बर २०११)
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